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इंट्राडे ट्रेडिंग के समय का Analysis

इंट्राडे ट्रेडिंग के समय का Analysis

शेयर मार्केट में ट्रेडिंग कितने प्रकार से की जाती हैं

आज हम समझेंगे Types of Trading Style कि हम कितने प्रकार से ट्रेडिंग कर सकते हैं जब एक बार आप शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने का निर्णय ले लेते हैं तो उसके बाद सबसे बड़ा इंट्राडे ट्रेडिंग के समय का Analysis निर्णय यह होता है कि आप किस प्रकार की शेयर ट्रेडिंग करना चाहते हैं शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने के बहुत सारे तरीके मौजूद हैं आज इन्ही तरीकों को समझने का प्रयास करेंगे ट्रेडिंग करने का कोई सा भी तरीका बहुत ज्यादा अच्छा या बुरा नहीं होता है बल्कि आपकी बाजार से उम्मीदें बाजार की जानकारी और रिस्क लेने की क्षमता के अनुसार ट्रेडिंग स्टाइल आपके लिए सही या गलत हो सकता है एक अच्छा ट्रेडिंग स्टाइल चुनने के लिए आपको आपके इमोशन Technical Analysis की जानकारी और ट्रेडिंग साइकोलॉजी का Analysis करना पड़ता है यह जानने के लिए कि कौन सा ट्रेडिंग स्टाइल आपके लिए अच्छा है ट्रेडिंग की शुरुआत में आप सभी ट्रेडिंग स्टाइल को ट्राई करके जरूर देखें और उसके बाद यह Analysis करिए कि कौन से ट्रेडिंग स्टाइल में आपका सक्सेस रेट अच्छा है उसके बाद जिस ट्रेडिंग स्टाइल पर आपको पूरा विश्वास है कि आप उसे सही तरीके से कर सकते हैं उसी ट्रेडिंग स्टाइल को चुनिए

तो चलिए अब हम कुछ ट्रेडिंग टाइप को समझ लेते हैं जो कि शेयर बाजार में बहुत ही पॉपुलर हैं सबसे पहले हम समझते हैं स्कल्पिन ट्रेडिंग को

दोस्तों यह ट्रेडिंग करने का सबसे छोटे समय का तरीका है स्कल्पिग ट्रेडिंग में शेयर्स को लेने के बाद कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनटओं में बेच दिया जाता है इससे बाजार में जो छोटे-छोटे मोमेंट आते हैं उनका फायदा उठाया जाता है और बाजार के बंद होने तक बहुत सारे ट्रेड किए जाते हैं उदाहरण के लिए मान लीजिए ABC शेयर का प्राइस ₹100 और आपने ₹100 के प्राइस पर 10000 शेयर खरीद लिए आप जैसे ही ABC शेयर का प्राइस ₹100 से बढ़कर ₹100.50 पैसे हो जाता है आप यह 10000 शेयर बेच देते हैं तो इसमें आपको ₹5000 का प्रॉफिट होगा इसे ही स्कल्पिग ट्रेडिंग कहते हैं

शेयर मार्केट में कितने प्रकार से ट्रेडिंग की जाती हैं

अब हम समझते हैं दूसरा तरीका इसे कहते हैं BTSTऔर STBT मतलब कि Buy Today Sell Tomorrow, Sell Today Buy Tomorrow इस में शेयर्स को आज के दिन की आखरी कैंडल में खरीदा या बेचा जाता है और अगले दिन बाजार आज की कैंडल के क्लोज प्राइस से ज्यादा या कम ओपन होता है इसका फायदा उठाने को बीटीएसपी और एसटीबीटी ट्रेडिंग कहते हैं

उदाहरण:- के लिए मान लीजिए कि abc शेयर का प्राइस आज 10% गिर चुका है और आपको Technical Analysis की मदद से यह लगता है कि कल शेयर और गिरेगा यह शेयर बहुत गिर चुका है कल यह थोड़ा सा ऊपर जाएगा तो इस आधार पर अगर इंट्राडे ट्रेडिंग के समय का Analysis आप आज शेयर खरीदारी करते हैं या बिकवाली करते हैं और कल बाजार खुलते ही Exit कर लेते हैं इसे ही बीटीएसटी एंड एसटीबीटी ट्रेडिंग कहते हैं

अब हम समझते हैं इंट्राडे ट्रेडिंग को जिसे day ट्रेडिंग भी कहते हैं इंट्राडे ट्रेडिंग के अंदर शेयर्स को खरीदकर कुछ घंटों या मार्केट बंद होने से पहले बेंच दिया जाता है इसमें दिन के दरमियान आने वाले मोमेंट का फायदा उठाया जाता है

उदाहरण:- के लिए मान abc शेयर की कीमत ₹100 आपने इस शेयर को ₹100 की प्राइस पर खरीद लिया है अब बाजार बंद होने से पहले abc शेयर का जो भी प्राइस हो आपको प्रॉफिट हो या लॉस। बुक करके निकलना ही होगा इसे ही इंट्राडे ट्रेडिंग कहते हैं

हम समझते हैं स्विंग ट्रेडिंग को जब शेयर्स को कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक रखकर सेल कर दिया जाता है तो इससे स्विंग ट्रेडिंग कहते हैं उदाहरण:- के लिए मान लीजिए abc शेयर अभी 100 रुपए पर चल रहा है और शेयर ने आज ही breakout दिया है तो आने वाले 1 से 2 हफ्तों में जो शेयर का मोमेंट होगा उसका फायदा उठा कर पैसा कमाना स्विंग ट्रेडिंग कहलाता है

अब हम समझते हैं पोजीशनल ट्रेडिंग को इसमें किसी शेयर को खरीद कर कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों या 1 साल के अंदर बेच दिया जाता है इसे पोजीशनल ट्रेडिंग कहते हैं इसमें लंबे मूवमेंट का फायदा उठाकर प्रॉफिट कमाया जाता है

उदाहरण के लिए मान लीजिए कि abc शेयर्स जिसका प्राइस ₹100 और अपने कंपनी के फंडामेंटल और टेक्निकल एनालिसिस की मदद से यह जान लिया है कि abc शेयर आने वाले 8 से 10 महीनों में 140 से ₹150 तक जा सकता है और शेयर खरीदकर 10 महीने बाद बेच देते हैं इसे ही पोजीशनल ट्रेडिंग कहते हैं

शेयर मार्केट में कितने प्रकार से ट्रेडिंग की जाती हैं

अब हम समझते हैं मोमेंटम ट्रेडिंग को जब किसी शेयर में ब्रेक आउट होता है तो उस ब्रेकआउट पर ट्रेडिंग करने को मोमेंटम ट्रेडिंग कहते हैं ब्रेकआउट कई प्रकार के होते हैं

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इस तस्बीर पर आप लोग देख पा रहे है। OPEN पिछले दिन के CLOSE से ऊपर है लेकिल पिछले 2 दिन के CLOSE से नीचे। पर इंट्राडे ट्रेडिंग के समय का Analysis इस तस्बीर पर और एक देखिये पिछले दिन के LOW पिछले 2 दिन के LOW से ऊपर है। पिछले 2 दिन के HIGH से पिछले दिन के HIGH कम है यानि नीचे है। ऐसे PRICE ACTION एक मजबूत डाउन ट्रेंड को दर्शाती है। ऐसे हालत में पिछले 2 दिन के CLOSE एक मजबूत RESISTANCE के तोर पर काम करती है यह एक पहला रेजिस्टेंस की तोर पर काम करती है ,दूसरी रेजिस्टेंस के तोर पर पिछले दिन की HIGH ,तीसरी रेजिस्टेंस के तोर पर पिछले 2 दिन के HIGH . ऐसे ही पहला सपोर्ट पिछले दिन की CLOSE ,दूसरी सपोर्ट पिछले दिन के LOW और तीसरी सपोर्ट पिछले 2 दिन के LOW होती है।

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HELLO FRIENDS ,आज आप लोग जानेंगे कॅश मार्किट और एक सेगमेंट कॅश इंट्राडे। इसे इंट्राडे ट्रेडिंग के नाम पर स्टॉक मार्किट में हर कोई जानते है। इंट्राडे ट्रेडिंग ये इन्वेस्टमेंट के लिए नहीं है। यह एक टेक्निक है। इंट्राडे ट्रेडिंग रिटेल ट्रेडर के लिए है क्यों की इसमें थोड़ा मार्जिन में भी आप ट्रेडिंग कर पाएंगे। इसमें आप मिनिमम 1000 रूपया लगा के भी ट्रेडिंग कर पाएंगे। ज्यादातर इंट्राडे ट्रेडर लॉस में जाते है। इश्का एक ही कारण है इंट्राडे टेक्निक की अधूरी जानकारी।इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए गलत शेयर चुनना हमेशा से हानिकारक है। इंट्राडे में ट्रेडिंग के लिए हर कोई शेयर हर दिन उपयुक्त नहीं होती है इसके लिए शेयर की सही चुनाब करना बहुत जरुरी है। जैसे नाम से ही पता चल रहा है इंट्राडे मतलब एक दिनों के अंदर। शेयर मार्किट सोमबार से सुक्रबार सुबाह 9.15से दोपहर 3.30तक चलती है और इंट्राडे ट्रेडिंग 9.15 से 3.15 तक चलती है। अर्थात इतनी समय में कोई भी शेयर से पैसे कामना कितना रिस्क है अगर सही टेक्निक पता न हो तो। इसलिए इंट्राडे ट्रेडिंग करने से पहले इसका टेक्निक सीखना बहुत जरुरी है। कॅश डिलीवरी और

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HELLO TRADERS आज आप जानेंगे कैंडल्स के HIGHER HIGH ,HIGHER LOW,LOWER LOW और LOWER HIGH के बारे में HIGHER HIGH CANDLE :- कोई भी कैंडल पिछले कैंडल की हाई को ब्रेक करके नई हाई बनाई होगी और पिछले कैंडल की हाई से ऊपर क्लोज दी होगी उसे higher high candle बोलते है। LOWER LOW CANDLE :- कोई भी कैंडल पिछले कैंडल की low को break करके नई low बनायीं होगी और पिछले कैंडल की low से निचे close हुई होगी उसे lower low कैंडल बोलते हैं। HIGHER LOW CANDLE :- कोई भी हायर हाई कैंडल की high और low के अंदर जो bearish candle होती है वही bearish candle की low को higher low candle बोलते हैं। LOWER HIGH CANDLE :- कोई भी lower low candle की high और low के अंदर जो bullish candle होती है वही bullish candle की high को lower high candle बोलते हैं।

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hello friends. १-कोई भी हायर हाई कैंडल की हाई और लौ के बिच जो बिरिश कैंडल फार्मेशन होती है उसी बिरिश कैंडल की लौ या उसकी रेंज जब तक ब्रेक नहीं होगी शेयर प्राइस नीचे नहीं जाएगी। अगर ब्रेक हो जाती है तो वह हायर हाई कैंडल की लौ तक जाएगी यानि हायर हाई की लौ एक मजबूत सपोर्ट बनेगी। अगर ये सपोर्ट यानि हायर हाई की लौ को ब्रेक करके जो भी कैंडल उसे नीची क्लोज देगी वही कैंडल की लौ ब्रेक हो जाने पर शेयर प्राइस डाउन यानि नीचे जानेकी मजबूती से तैयार करती है। २-कोई भी लोअर लौ कैंडल की लौ और हाई के बिच जो बुलिश कैंडल फार्मेशन होती है उसी बुलिश कैंडल की हाई या उसकी रेंज जबतक ब्रेक नहीं होगी शेयर प्राइस ऊपर नहीं जाएगी। अगर ब्रेक हो जाती है तो वह लोअर लौ कैंडल की हाई तक जाएगी। यानि लोअर लौ की हाई एक मजबूत रेजिस्टेंस बनेगी अगर यह रेजिस्टेंस यानि लोअर लौ की हाई को ब्रेक करके जो भी कैंडल इसे ऊपर क्लोज देगी वही कैंडल की हाई ब्रेक हो जाने पर शेयर प्राइस ऊपर जाने की मजबूती से तैयार करती है।

इंट्राडे ट्रेडिंग के समय का Analysis

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इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है- What is Intraday Trading in Hindi ?

  • Post last modified: November 10, 2019
  • Post author: Yogesh Singh
  • Post category: Share Market
  • Post comments: 0 Comments

Intraday meaning in hindi -हैलो दोस्तों ! आज हम जानेगे कि बाज़ार में पैसा कमाने के लिए जरुरी नहीं की आप को सालों साल इंतज़ार करना पड़े बल्कि स्टॉक मार्किट में इंट्राडे ट्रेडिंग एक ऐसा निवेश करने का तरीका है जिसके माध्यम से आप एक दिन के अंतराल में ही जान सकते है इंट्राडे ट्रेडिंग के समय का Analysis कि आपको मुनाफा हुआ है की नुकसान तो आज हम जानेगे की इंट्राडे ट्रेडिंग क्या होता है ? (Intraday meaning in hindi) आइये विस्तार में जानते है |

Intraday Trading क्या होता है – Intraday meaning in Hindi?

इंट्राडे जैसा की नाम से ही पता चलता है “दिन के अंतराल” तो ऐसे ट्रेड जिनको एक दिन के अंतराल में ही पूरा कर लिया जाता है इंट्राडे ट्रेडिंग कहलाता है | इंट्राडे में आप सुंबह 9:15 बजे से लेकर शाम 3 :30 बजे तक शेयर्स को खरीद व बेच सकते है |आपको इंट्राडे में सिर्फ एक दिन के अंतराल में ही अपना सौदा पूरा करना पड़ता चाहे आपको फायदा हो या नुक्सान आपको शाम 3:30 बजे तक अपनी पोजीशन को square off यानी बराबर करना पड़ता है |

आपने शेयर्स खरीदे है तो शाम तक आपको उसे बेचना होगा और अगर आपने Short Sell करके शेयर्स बेचे है तो शाम तक आपको उन्हें खरीदना होगा वरना आपकी पोजीशन auto square off हो जायेगी मतलब की बाजार के बंद होने पर जो शेयर्स का भाव होगा उसमे आपके शेयर्स बेच दिये जायंगे |

Note: अगर आपने short sell किया हुआ है और शाम तक आपने उन बेचे हुए शेयर्स को नहीं खरीदा तो आप Defaulter हो जाओगे जिसमे आपको Penalty देनी पड़ेगी |

Intraday ट्रेडिंग कैसे करे ?

Intraday Trading करने के लिए आपके पास एक ट्रेडिंग अकाउंट का होना अनिवार्य है जो आप किसी भी ब्रोकर्स के पास खुलवा सकते है क्योकि शेयर्स के पैसो का लेन देन केवल ट्रेडिंग अकाउंट के माधयम से ही किया जाता है अधिक जानकारी के लिए आप हमारी ट्रेडिंग क्या होता है वाली पोस्ट देख सकते है और अगर आप Zerodha पर ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाना चाहते है तो यह पोस्ट देखे |

ज्यादा Volume वाले शेयर्स खरीदे –

आपको ऐसे शेयर्स खरीदने चाहिए जिसमे बहुत ज्यादा Volume हो अथार्थ ऐसे शेयर्स जो ज्यादा खरीदे और बेचे जाए ताकि आपको शेयर्स में Liquidity बनी रहे और आप जब चाहे उन्हें बेच सके |

हमेशा अपना Risk Manage करके चले –

शेयर्स खरीदेने से पूर्व अपना maximum loss और profit दिमाग में रख ले यदि इतना मुनाफा होगा तो में शेयर्स बेच दूंगा या फिर में ज्यादा से ज्यादा इतना नुकसान ही झेलूँगा इससे नीचे शेयर्स बेच दूंगा ज्यादा लालची न बने अपना Risk Manage करके चले |

Volatility वाले शेयर्स पर ही ध्यान दे –

अगर आप ऐसे शेयर्स खरीदेंगे जिसमे कोई movement ही नहीं है तो आप मुनाफा नहीं कमा पाएंगे ऊपर से आपको ब्रोकरेज भी देना होगा केवल उन्ही शेयर्स को खरीदे जिसमे मूवमेंट हो जिसके प्राइस ऊपर नीचे अथार्त Volatility हो तभी आप मुनाफा कमा पाएंगे |

इंट्रा डे ट्रेडिंग (Intraday Trading) के फायदे –

Daily Income कमाने का जरिया –

इस प्रकार के ट्रेड में आप दैनिक आय भी कमा सकते है जो की Long Term Investment में नहीं होस सकता है ,लेकिन आपको ट्रेडिंग को फुल टाइम समय देना होगा और अपने कौशल को बढ़ाना होगा तभी आप इसमें नियमित रूप से मुनाफा कमा पाएंगे |

Overnight Position का जोखिम –

शेयर बाजार में overnight position भी एक इंट्राडे ट्रेडिंग के समय का Analysis risk की तरह ही है मान लो रातो रात कोई हमला हो जाये या फिर कोई आर्थिक जगत की ऐसी खबर आ जाये जिससे अगले दिन बाजार में शेयर्स के दाम पिछले दिन की क्लोजिंग प्राइस से भी बहुत नीचे गिर जाए तो ऐसे में केवल निवेशक को नुकसान ही होता है | लेकिन इंट्राडे में सौदे एक दिन में ही पूरे कर लिए जाते है तो इसमें overnight position risk नहीं होता|

Margin Money की सुविधा –

Intraday ट्रेडिंग का सबसे बड़ा फायदा यह की आप कम निवेश में भी बड़ा ट्रेड ले सकते क्योँकि इसमें ब्रोकर 10 गुना से भी अधिक मार्जिन मनी दे देता है मान लीजिये आपके पास केवल 10 हज़ार ही है और आपका ब्रोकर आपको 10 गुना मार्जिन दे देता है तो आप 1 लाख तक के शेयर्स खरीद सकते है |

Short Selling की सुविधा –

आप सस्ते में शेयर खरीद कर महंगे में बेचने के अलावा Short Selling से भी पैसा कमा सकते है मान लीजिये आपको लगता है कि किसी शेयर में काफी गिरावट आने वाली है तो आप उस शेयर को बिना खरीदे भी बेच सकते है और जब शेयर का दाम में गिरावट आये तो उसे खरीदकर अपना मुनाफा कमा सकते है | मान लीजिये आपको लगता है रिलायंस कंपनी के शेयर जो की Rs 100 चल रहा है वह 99 का हो जायेगा तो आपने Rs 100 प्रति इंट्राडे ट्रेडिंग के समय का Analysis शेयर के हिसाब से 10,000 शेयर्स बेच दिए जो की आपको 10 लाख के पड़े अब मान लीजिये आप के मुताबिक़ वह शेयर Rs 99 प्रति शेयर हो गए तो आपने वह 10000 शेयर्स Rs 99 प्रति शेयर के हिसाब से खरीद लिए जो कि आपको Rs 99,0000 के पड़े जैसा की हमने देखा शेयर्स बेचने और खरीदने में Rs 10,000 का अतर है वही आपका मुनाफा भी है |

Intraday Trading में ध्यान देने वाली बाते (Intraday Trading tips in hindi)–

  • हमेशा बाजार का सम्मान करें और बाजार की दिशा के साथ ही अपना ट्रेड करें |
  • स्टॉप लॉस लगाना न भूले |
  • अफवाहों पर ध्यान न दे |
  • ट्रेड लेने से पहले Trend को जरूर देख ले |
  • ट्रेड करने से पहले हमेशा थोड़ा homework करें |
  • एक ट्रेड में 3% से अधिक पूंजी न खोएं |
  • हमेशा Risk Manage करके चले |
  • बाजार हमेशा सही ही होता है हम गलत हैं – इस सिद्धांत का पालन करें |

Intraday Trading के बारे में कुछ गलतफमियाँ –

भारत मे बहुत से लोगो के मन में इंट्राडे ट्रेडिंग के प्रति काफी गलत धारणाएं है | उन्हें लगता है कि यह सिर्फ एक जुआ है, और कितने ही लोग इसमें पैसा लगाकर बर्बाद हो चुके है। आइये जानते है वह सारी गलत धारणाएं –

  1. इंट्राडे ट्रेडिंग बहुत सारे पैसे बहुत कम समय में इंट्राडे ट्रेडिंग के समय का Analysis कमाने का एक जरिया है |
  2. इंट्राडे ट्रेडिंग एक जुआ है |
  3. हर कोई इंट्राडे ट्रेडिंग से पैसा बना सकता है केवल CNBC देखकर |
  4. इंट्राडे ट्रेडिंग बिना किसी अध्ययन के की जा सकती है |
  5. निवेश करने के लिए आपको लाखो रुपये की आवश्यकता है |
  6. आपको पैसा केवल Bull मार्किट में ही बन सकता है |

Conclusion

इंट्राडे ट्रेडिंग नियमित रूप से पैसे कमाने का एक बहुत अच्छा जरिया है लेकिन इसमे 99% प्रतिशत लोग केवल नुकसान ही करते है क्योँकि बिना skills के आप ज्यादा देर तक मार्किट में नहीं टिक सकते | लेकिन असंभव कुछ भी नहीं अगर आप खुद पर काम करते है पूरा technical analysis करते है तो आप जरूर इसमें पैसा बना पायेगे | तो आज हमने सीखा कि इंट्राडे ट्रेडिंग क्या होता है -Intraday meaning in Hindi ?

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इस तस्बीर पर आप लोग देख पा रहे है। OPEN पिछले दिन के CLOSE से ऊपर है लेकिल पिछले 2 दिन के CLOSE से नीचे। पर इस तस्बीर पर और एक देखिये पिछले दिन के LOW पिछले 2 दिन के LOW से ऊपर है। पिछले 2 दिन के HIGH से पिछले दिन के HIGH कम है यानि नीचे है। ऐसे PRICE ACTION एक मजबूत डाउन ट्रेंड को दर्शाती है। ऐसे हालत में पिछले 2 दिन के CLOSE एक मजबूत RESISTANCE के तोर पर काम करती है यह एक पहला रेजिस्टेंस की तोर पर काम करती है ,दूसरी रेजिस्टेंस के तोर पर पिछले दिन की HIGH ,तीसरी रेजिस्टेंस के तोर पर पिछले 2 दिन के HIGH . ऐसे ही पहला सपोर्ट पिछले दिन की CLOSE ,दूसरी सपोर्ट पिछले दिन के LOW और तीसरी सपोर्ट पिछले 2 दिन के LOW होती है।

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STOCK MARKET ME PRICE ACTION KI HIGHER HIGH,HIGHER LOW,LOWER LOW AND LOWER HIGH KISKO BOLTE HAIN

HELLO TRADERS आज आप जानेंगे कैंडल्स के HIGHER HIGH ,HIGHER LOW,LOWER LOW और LOWER HIGH के बारे में HIGHER HIGH CANDLE :- कोई भी कैंडल पिछले कैंडल की हाई को ब्रेक करके नई हाई बनाई होगी और पिछले कैंडल की हाई से ऊपर क्लोज दी होगी उसे higher high candle बोलते है। LOWER LOW CANDLE :- कोई भी कैंडल पिछले कैंडल की low को break करके नई low बनायीं होगी और पिछले कैंडल की low से निचे close हुई होगी उसे lower low कैंडल बोलते हैं। HIGHER LOW CANDLE :- कोई भी हायर हाई कैंडल की high और low के अंदर जो bearish candle होती है वही bearish candle की low को higher low candle बोलते हैं। LOWER HIGH CANDLE :- कोई भी lower low candle की high और low के अंदर जो bullish candle होती है वही bullish candle की high को lower high candle बोलते हैं।

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hello friends. १-कोई भी हायर हाई कैंडल की हाई और लौ के बिच जो बिरिश कैंडल फार्मेशन होती है उसी बिरिश कैंडल की लौ या उसकी रेंज जब तक ब्रेक नहीं होगी शेयर प्राइस नीचे नहीं जाएगी। अगर ब्रेक हो जाती है तो वह हायर हाई कैंडल की लौ तक जाएगी यानि हायर हाई की लौ एक मजबूत सपोर्ट बनेगी। अगर ये सपोर्ट यानि हायर हाई की लौ को ब्रेक करके जो भी कैंडल उसे नीची क्लोज देगी वही कैंडल की लौ ब्रेक हो जाने पर शेयर प्राइस डाउन यानि नीचे जानेकी मजबूती से तैयार करती है। २-कोई भी लोअर लौ कैंडल की लौ और हाई के बिच जो बुलिश कैंडल फार्मेशन होती है उसी बुलिश कैंडल की हाई या उसकी रेंज जबतक ब्रेक नहीं होगी शेयर प्राइस ऊपर नहीं जाएगी। अगर ब्रेक हो जाती है तो वह लोअर लौ कैंडल की हाई तक जाएगी। यानि लोअर लौ की हाई एक मजबूत रेजिस्टेंस बनेगी अगर यह रेजिस्टेंस यानि लोअर लौ की हाई को ब्रेक करके जो भी कैंडल इसे ऊपर क्लोज देगी वही कैंडल की हाई ब्रेक हो जाने पर शेयर प्राइस ऊपर जाने की मजबूती से तैयार करती है।

स्टॉक चार्ट कैसे पढ़ें: आइए बुनियादी बातों पर गौर करते हैं

स्टॉक चार्ट पढ़ें — Olymp Trade आधिकारिक ब्लॉग

ट्रेडिंग चार्ट ट्रेडर को असेट की कीमत में बदलाव पर नज़र बनाए रखने, नुकसान से बचने और सही ट्रेडिंग निर्णय लेने में मदद करते हैं। प्रत्येक ग्राफ महत्वपूर्ण जानकारी की एक श्रृंखला है। इस जानकारी को सही ढंग से पढ़ना और विश्लेषण करना लाभदायक ट्रेड का एक अनिवार्य अंग है।

विषय-वस्तु:

अतिरिक्त विवरण और स्पष्टीकरण प्राप्त करने के लिए डैश युक्त नीला शब्द और चित्रों के ऊपर स्थित हरे बिंदु के साथ अंतर्क्रिया करें।

दृश्य सामग्री पर अधिक विवरण यहां होंगे।

शब्द की परिभाषा या स्पष्टीकरण यहां उपलब्ध होगा।

स्टॉक चार्ट को कैसे पढ़ना है इसके सम्बन्ध में निवेशकों को जानकारी क्यों होनी चाहिए

भाव चार्ट किसी असेट की वर्तमान कीमत और समय के साथ परिवर्तन को दिखाते हैं। यह आपको किसी निश्चित समय पर किसी असेट की कीमत का पता लगाने और उनकी दिशा का पूर्वानुमान लगाते हुए भाव में उतार-चढ़ाव के सामान्य पैटर्न का अध्ययन करने में सक्षम बनाता है।

अपडेट दर प्लेटफ़ॉर्म की तकनीकी क्षमताओं और निश्चित असेट में ट्रेडिंग की तीव्रता पर निर्भर करती है। Olymp Trade प्लेटफॉर्म पर, नियमत:, प्रति सेकंड 4 भाव तक को प्रदर्शित किए जाते हैं। समय सीमा एक निश्चित समय का अंतराल है जिसके दौरान भाव की गतिविधि की निगरानी की जाती है।

उदाहरण के लिए, Olymp Trade प्लेटफॉर्म 15 सेकंड, 1, 5, 15, 30 मिनट, 1 से 4 घंटे, 1 से 7 दिन और एक महीने तक की समय-सीमा का उपयोग करता है।

एक समय-सीमा का चयन कर, आप यह निर्धारित करते हैं कि आप किस भाव उतार-चढ़ाव के ट्रेंड में ट्रेड करते हैं - अल्पावधि, मध्यम-अवधि, या लम्बी-अवधि। कम समय सीमा के लिए, अल्पावधि ट्रेडिंग - स्काल्पिंग करना उपयुक्त होता है। धीमी वृद्धि में निवेश करने के लिए लंबी समय सीमा - दिन, सप्ताह या महीने अधिक उपयुक्त होती हैं। दिवसीय ट्रेडिंग - इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए मिनटों और घंटों के अंतराल में समय सीमा अधिक उपयुक्त हैं।

चार्ट के कितने प्रकार मौजूद हैं?

भाव को ट्रैक करने के लिए कई प्रकार के चार्ट हैं। यहां चार सबसे लोकप्रिय प्रकार दिए गए हैं और ये सभी Olymp Trade प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।

लाइन चार्ट (एरिया चार्ट)

यह सबसे आसान तरीका है। यह किसी असेट की कीमत में उतार-चढ़ाव दिखाने वाला सबसे विस्तृत चार्ट है। यह लाइन चार्ट ट्रेडिंग के अंत में स्टॉक की कीमत को प्रदर्शित करता है।

एरिया चार्ट – Olymp Trade – 5.07.2022

कैंडलस्टिक चार्ट या जापानी कैंडलस्टिक्स

यह ग्राफ़ असेट की कीमत के बारे में अतिरिक्त जानकारी प्रदर्शित करता है। ट्रेडर बंद करने, खोलने की लागत और असेट के अधिकतम और न्यूनतम कीमत को देख सकता है। बढ़ते कैंडल हरे रंग के होते हैं जबकि गिरते हुए कैंडल लाल रंग के होते हैं।

जब खरीदार कीमत को ऊपर पहुँचते हैं तो हरे कैंडल एक अपट्रेंड को इंगित करता है। शरीर की निचली अंश प्रारंभिक कीमत को दर्शाती है, और ऊपरी - समापन कीमत को। कैंडलस्टिक (विक्स) की ऊपरी और निचली छाया एक निश्चित अवधि के भीतर असेट की उच्चतम और निम्नतम कीमत को दिखाती है। इसके विपरीत लाल कैंडल में, शरीर की ऊपरी सीमा प्रारंभिक कीमत और निचली समापन कीमत को दर्शाती है।

कैंडलस्टिक चार्ट – Olymp Trade – 5.07.2022

हाइकेन आशी

यह एक औसत जापानी कैंडलस्टिक चार्ट की तरह दिखता है, लेकिन यह एक इंडिकेटर है। यह ट्रेंड विश्लेषण को सरल बनाता है, इस प्रकार असेट की कीमत के उतार-चढ़ाव की दिशा और वर्तमान ट्रेंड की ताकत को बेहतर ढंग से निर्धारित करने में मदद करता है। यह प्रारंभिक और समापन कीमतों और अधिकतम और न्यूनतम भावों के औसत से प्राप्त किया जाता है। इस प्रकार के चार्ट आपको बाज़ार के शोर-गुल को दूर करते हुए ट्रेंड को अधिक स्पष्ट रूप से ट्रैक करने में सक्षम बनाता है।

हाइकेन आशी – Olymp Trade – 5.07.2022

बार चार्ट।

हालांकि यह चार्ट जापानी कैंडलस्टिक्स की तुलना में अधिक जटिल नज़र आता है, लेकिन यह केवल दिखने में भिन्न है। किसी असेट की कीमत में परिवर्तन निर्धारित करने के लिए, आपको बगल पर हॉरिजॉन्टल रेखाओं को देखना होगा, जिन्हें "ईयर" कहा जाता है।

बार चार्ट – Olymp Trade – 5.07.2022

तकनीकी विश्लेषण कैसे एक ट्रेडर की मदद करता है

तकनीकी विश्लेषण का काम यहीं पर आता है। यह तीन अभिधारणाओं पर आधारित है:

  • कीमत पर सभी चीज़ों का प्रभाव पड़ता है। यह उन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए बनती है जो इसे प्रभावित कर सकते हैं (आर्थिक, राजनीतिक, मनोवैज्ञानिक, आदि)।
  • भावों में उतार-चढ़ाव एक विशिष्ट ट्रेंड के ढांचे के अंतर्गत होता है।
  • इतिहास की पुनरावृत्ति होती है। भावों के पिछले उतार-चढ़ाव के आधार पर, आप भविष्य की भविष्यवाणी कर सकते हैं।

आप ग्राफिकल या गणितीय टूल्स का उपयोग करके दो मुख्य तरीकों से स्टॉक चार्ट का विश्लेषण और पढ़ सकते हैं।

ग्राफिकल (चित्रात्मक) विश्लेषण

इस प्रकार के विश्लेषण में ड्राइंग टूल शामिल होते हैं, जैसे कि Olymp Trade प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध साधन। उनकी मदद से आप कुछ महत्वपूर्ण ग्राफिक्स खुद बना सकते हैं।

ड्राइंग टूल्स – Olymp Trade – 5.07.2022

आप यहां ड्राइंग इंस्ट्रूमेंट्स पा सकते हैं।

आपको यहां इंडिकेटर टैब खोलने की आवश्यकता है।

ट्रेंडलाइन।

ट्रेंड लाइन पर ध्यान केंद्रित कर निवेशक यह निर्धारित कर पाता है कि असेट बढ़ रहा है या नहीं। यदि ट्रेंड लाइन में अपवर्ड ट्रेंड विद्यमान है, तो ट्रेंड सकारात्मक है। यदि रेखा नीचे चली जाती है, तो ट्रेंड नकारात्मक होती है। यदा-कदा, ट्रेंड रेखा एक हॉरिजॉन्टल सीधी रेखा की तरह दिख सकती है।

सपोर्ट और रेज़िस्टेंस।

ये असेट के अधिकतम और न्यूनतम कीमत के स्तरों की प्रतिबंधात्मक सीमाएं हैं। सपोर्ट स्तर वर्तमान मूल्य सीमा के नीचे होता है, और रेज़िस्टेंस स्तर शीर्ष पर अवस्थित होता है। इस अंतराल के भीतर कुछ समय के लिए भाव चल सकते हैं, और इस स्थिति को कभी-कभी फ्लैट (सपाट) कहा जाता है।

हालांकि, समय के साथ, कीमतें एक स्तर तक पहुंच जाती हैं (परीक्षण करती है) और फिर या तो पीछे हट जाती हैं (रिफ्लेक्ट होती हैं) या इस स्तर को पार कर जाती हैं। स्तर के टूटने से अक्सर अपट्रेंड या डाउनट्रेंड घटित होता है।

कैंडलस्टिक पैटर्न और ग्राफिकल (चित्रात्मक) बनावट।

ये तकनीकी विश्लेषण के आंकड़े होते हैं जिन्हें भाव चार्ट पर प्लॉट (चित्रित) किया जा सकता है। प्रत्येक पैटर्न की अपनी विशेषताएं होती हैं और यह ट्रेंड की निरंतरता और इसके उलट होने का संकेत दे सकता है। डोजी, थ्री ब्लैक क्रोज़ और क्लाउड पैटर्न इसके अच्छे उदाहरण हैं।

हेड एंड शोल्डर, फ्लैग और डबल टॉप जैसे ग्राफिकल बनावट के पैटर्न आपको लंबी-अवधि के ट्रेंड की गणना करने में सक्षम बनाते हैं।

आप इस लेख में स्टॉक चार्ट पैटर्न को पढ़ने के तरीके के बारे में Olymp Trade ब्लॉग या सहायता केंद्र पर अधिक पढ़ सकते हैं।

गणितीय विश्लेषण में, हमारे पास फाइबोनाची साधन, इंडिकेटर और ऑसिलेटर उपलब्ध हैं।

गणितीय विश्लेषण

जटिल गणितीय गणनाओं के आधार पर भावों का विश्लेषण करते समय अधिक जटिल साधनों का भी उपयोग किया जाता है। तकनीकी विश्लेषण के साधन के कुछ उदाहरण फाइबोनाची स्तर और फाइबोनाची फैन हैं। उनकी सहायता से, आप उन संभावित स्तरों की गणना कर सकते हैं जिन पर मौजूदा ट्रेंड तेज होगा या उलट जाएगा। आप हमारे ब्लॉग पर एक इंट्राडे ट्रेडिंग के समय का Analysis विशेष लेख में इसके बारे में अधिक पढ़ सकते हैं।

इंडिकेटर गणितीय विश्लेषण साधन का एक और उदाहरण हैं। Olymp ट्रेड प्लेटफॉर्म के पास इंडिकेटर का एक विस्तृत संकलन है और उन्हें सेट-अप करने और उनका उपयोग करने के बारे में मूल्यवान सुझाव वहाँ उपलब्ध कराया गया है।

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