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ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग सिस्टम कैसे काम करता है

ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग सिस्टम कैसे काम करता है
भारत के शेयर मार्केट

ASBA : जानिए शेयर बाजार में निवेश करने वालों को कैसे फायदा पहुंचाएगा

आइए अब इस प्रस्तावित प्रणाली के बारे में विस्तार से जानते हैं:

ASBA क्या है?

ASBA (Application Supported by Blocked Amount), एक खास तरह का पेमेंट सिस्टम है जिसका इस्तेमाल आईपीओ के लिए अर्जी लगाने के दौरान होता है। वर्ष 2008 से यह उपयोग में है। इससे पहले, निवेशकों को आईपीओ के लिए आवेदन करते समय या तो पैसा चेक से जमा करना होता था या आईपीओ के उद्देश्य से बनाए गए एस्क्रो खाते (escrow account) में अपने खाते से ऑनलाइन पैसा ट्रांसफर करना पड़ता था।

उस समय, एक आईपीओ के बंद होने और शेयरों के आवंटन के बीच की समयावधि 10 दिनों से अधिक ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग सिस्टम कैसे काम करता है थी। नतीजतन, पैसा एक निवेशक के बैंक खाते से डेबिट हो जाता था, भले ही उसे शेयर का आवंटन हुआ हो या नहीं।

ASBA के आने के साथ ही पेंमेंट की पूरी प्रक्रिया बदल गई। इस सिस्टम के तहत आईपीओ के लिए अर्जी देते समय केवल एक निवेशक के बैंक खाते में पैसा अवरुद्ध (ब्लॉक) रहता है। शेयरों के आवंटन के मामले में, आवश्यक धनराशि डेबिट हो जाती है जबकि आवंटन नहीं होने की स्थिति में पूरी ब्लॉक्ड राशि अनब्लॉक्ड हो जाती है।

सेकेंडरी मार्केट के लिए ASBA क्यों?

फिलहाल semi-ASBA जैसी प्रणाली उन निवेशकों के लिए पहले से ही मौजूद है जिनके पास 3-इन-1 बैंक खाता है। इस तरह की सुविधा आमतौर पर ऐसे ब्रोकरेज हाउस देते हैं, जिनकी खुद (यानी प्रमोटर की) की बैंकिंग सेवाएं हैं। 3-इन-1 खाते में एक बचत बैंक खाता (सेविंग बैंक अकाउंट), एक डीमैट खाता और एक ट्रेडिंग खाता शामिल होता है।

यहां ऑर्डर देने के समय आवश्यक फंड डेबिट हो जाता है। ऑर्डर देने से पहले फंड के भुगतान की जरूरत नहीं होती। यह इसलिए संभव है क्योंकि बैंक ब्रोकरेज हाउस, जो इसकी सहायक कंपनी है, को ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग सिस्टम कैसे काम करता है अपने कोर बैंकिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच प्रदान करता है।

हालांकि, एक बैंक तीसरे पक्ष के ब्रोकरेज हाउस के लिए ऐसा नहीं करता है। नतीजतन, निवेशकों को अपने ट्रेड से पहले भुगतान (ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग सिस्टम कैसे काम करता है फंड ट्रांसफर) करना होता है।

सेकेंडरी मार्केट के लिए ASBA जैसी प्रणाली के लागू होने के बाद, निवेशक केवल यह सुनिश्चित करके आदेश दे सकेंगे कि उनके बैंक खाते में पर्याप्त धनराशि है। आईपीओ की तरह, पैसा तभी निकलेगा जब ट्रेड की पुष्टि हो जाएगी।

दुरुपयोग पर लगाम

हाल के वर्षों में, ब्रोकर्स द्वारा निवेशकों की प्रतिभूतियों का दुरुपयोग करने के कई उदाहरण सामने आए हैं। ब्रोकर पहले अपने क्लाइंट की प्रतिभूतियों को एक ट्रेडिंग खाता खोलते समय प्राप्त पॉवर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) के माध्यम से एक्सेस करने में सक्षम थे। इतना ही नहीं ब्रोकर्स की पहुंच ग्राहकों द्वारा रेहन के रूप में गिरवी रखी प्रतिभूतियों तक भी थी।

इस तरह के कदाचार को रोकने के लिए, सेबी ने ‘pledge and re-pledge’ नामक एक तंत्र की शुरुआत की और पॉवर ऑफ अटॉर्नी (पीओए) के चलन को भी समाप्त कर दिया।

नई प्रणाली के तहत, निवेशक ब्रोकर्स को उनकी प्रतिभूतियों तक सीधे पहुंच की अनुमति के बिना, अपनी गिरवी प्रतिभूतियों का उपयोग जमानत के तौर पर कर सकते हैं। इस सिस्टम के तहत निवेशकों के प्रतिभूतियों के दुरुपयोग पर लगाम लगा है।

सेकेंडरी मार्केट के लिए ASBA यह सुनिश्चित करेगा कि ब्रोकर्स को भी निवेशकों के धन तक पहुंच प्राप्त न हो। वर्तमान में, ब्रोकर अपने पास पड़े निवेशकों के पैसे पर फ्लोट (float) का उपयोग कर कमाते हैं। इसके अलावा, ऐसे भी उदाहरण हैं जब ब्रोकरों ने सेबी के आदेशानुसार 30 दिनों या 90 दिनों की अवधि के बाद उनके पास पड़े बेकार धन को वापस ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग सिस्टम कैसे काम करता है नहीं किया।

हालांकि, जून में सेबी द्वारा जारी एक सर्कुलर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ब्रोकर निवेशक के रनिंग अकाउंट का सेटलमेंट निर्धारित समय अवधि के भीतर सुनिश्चित करें।

कार्यान्वयन को लेकर चुनौतियां

सेबी ने अभी तक सेकेंडरी मार्केट के लिए ASBA के कार्यान्वयन को लेकर न तो कोई सर्कुलर जारी किया है या कोई समय सीमा निर्धारित की है। इस सप्ताह एक कार्यक्रम में सेबी की अध्यक्ष माधबी पुरी बुच ने कहा कि चुनौतियों के बावजूद, नई प्रणाली कुछ महीनों में तैयार हो जाएगी।

इंडस्ट्री प्लेयर्स का कहना है कि आईपीओ बाजार के लिए ASBA के अमल में आए हुए एक दशक से भी अधिक का समय हो गया है, लेकिन इसे सेकेंडरी मार्केट में लाने पर अधिक जटिल चुनौतियों का सामना करना पड सकता है।

ग्राहक द्वारा एक दिन में किए जाने वाले कई ट्रेड के लिए पैसे को ब्लॉक करने और अनब्लॉक करने के बहुत सारे उदाहरण होंगे। इसके अलावा, ASBA ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग सिस्टम कैसे काम करता है में भी, विफलता दर और ब्लॉक करने में अधिक समय लगने जैसे मुद्दे हैं।

5पैसा के सीईओ प्रकाश गगदानी कहते हैं, 'वहीं इसका सकारात्मक पक्ष यह है कि, पूरी फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया मानकीकृत होगी। मुझे लगता है कि बैंकों, ब्रोकर्स और अन्य बिचौलियों के बीच परिचालन कार्यान्वयन में लगने वाले वक्त के मद्देनजर इसे लागू होने में कुछ समय लगेगा।'

एसोसिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंज मेंबर्स ऑफ इंडिया (एएनएमआई) के अध्यक्ष कमलेश शाह कहते हैं, 'मार्जिन सिस्टम को नई प्रणाली के साथ संबद्व करने की आवश्यकता होगी। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) में, केवल मार्जिन कलेक्ट किया जाता है। नई प्रणाली के के तहत निवेशक द्वारा बैंक को कई निर्देश देने की आवश्यकता हो सकती है। कई इंट्राडे ट्रेड करने वाले लोगों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण काम होगा।'

कैसे करें शेयर बाजार में निवेश ?

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शेयर या स्टॉक मार्केट एक ऐसी जगह है जहां पर आप अपने पैसे को निवेश करके अच्छी खासी रकम कमा सकते हैं. यह मार्केट पूरी तरह से देश की अर्थव्यवस्था, वैश्विक संकेतों, मुद्रा और आरबीआई की नीतियों आदि पर निर्भर करता है. स्टॉक मार्केट में अलग-अलग कंपनियों के नाम से शेयर होते हैं. इसमें निवेश करते समय नए निवेशकों को शुरुआती दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. लेकिन जब वही निवेशक शेयर मार्केट को अच्छी तरह से समझने लगता है तब वह एक अनुभवी खिलाड़ी बन जाता है.

स्टॉक मार्केट में होते हैं कई सेक्टर

स्टॉक मार्केट में अलग-अलग तरह के क्षेत्र होते हैं. ऑयल, रियल इस्टेट, बैंकिंग, ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग सिस्टम कैसे काम करता है कंज्यूमर गुड्स, मेटल, स्टील, पावर, संचार यह कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर निवेशक अपनी पसंद के अनुसार निवेश कर सकता है. अगर किसी निवेशक को अपनी पसंदीदा कंपनी चुननी है तो सबसे पहले उसे कंपनी के बारे में जानना होगा. बैलेंस सीट के साथ-साथ क्या है उस कंपनी का टर्नओवर उसके बारे में भी निवेशक को जानकारी हासिल करनी चाहिए.

चुनें अपने बेस्ट सेक्टर

जैसा कि हमने ऊपर देखा कि निवेशकों के सामने ऐसे बहुत सारे सेक्टर होते हैं जहां पर वह निवेश करता है. इन सेक्टरों में कौन सा सबसे अच्छा क्षेत्र होगा जो निवेशकों को छोटी और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सके इस बात को बता पाना किसी के लिए भी मुश्किल भरा काम है. यह काम और अधिक मुश्किल हो जाता है जब देश की अर्थव्यवस्था सही न हो और विश्व आर्थिक संकट से गुजर रहा हो. ऐसे स्थिति में विशेषज्ञों की सलाह होती है कि मिड कैप स्टॉक को चुनें क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में लार्ज कैप स्टॉक बहुत ही ज्यादा गोता लगाते हैं.

कैसे करें निवेश

निवेश करने वाले व्यक्ति के सामने यह पहला सवाल होगा कि निवेश कैसे किया जाए ? सबसे पहले ये तय करें कि आप जो भी निवेश करना चाह रहे हैं, उसकी आपको जरूरत कब है क्योंकि इससे आप लंबी और छोटी अवधि के शेयरों का चुनाव कर सकते हैं. निवेश करने के लिए आप जिस कंपनी का शेयर लेंगे उसके बारे में आप अच्छी तरह से जानकारी कर लें. इसके लिए आप सलाहकारों की मदद ले सकते हैं. यह जरूरी नहीं है कि आप एक ही कंपनी में निवेश करें. एक से अधिक कंपनियों में भी निवेश कर सकते हैं.ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग सिस्टम कैसे काम करता है

डीमैट अकाउंट है जरूरी

निवेश के लिए आपके पास डीमैट अकाउंट होना जरूरी है इसके लिए आपको किसी भी बैंक या शेयर खान, रिलायंस मनी और इंडिया इन्फोलाइन जैसी शेयर ब्रोकरेज कंपनियों से संपर्क करना पड़ेगा. कुछ समय पहले तक शेयरों की फिजिकल ट्रेडिंग होती थी. इसमें शेयर सीधे ट्रांसफर होते थे. पर अब ऐसा नहीं है. अब इनकी खरीद-बिक्री किसी बैंक या वित्तीय संस्थान के डीमैट खाते के जरिए होती है. आप खुद या आपके स्थान पर कोई शेयर ब्रोकिंग कंपनी शेयरों की खरीद-बिक्री कर सकती है.

निवेश की अवधि

निवेशक निवेश करने के लिए दो तरह के तरीकों को अपना सकते हैं. लंबी और छोटी अवधि के लिए निवेश. छोटी अवधि में खरीदे गए शेयर को निवेशक 3-6 महीने के लिए अपने पास रख सकते हैं. जबकि लंबी अवधि में खरीदे गए शेयर को 6 महीने से ऊपर तक अपने पास रख सकते हैं. आम निवेशकों को सलाह दी जाती है कि लंबी अवधि का निवेश सही रहता है क्योंकि डे-ट्रेडिंग और छोटी अवधि के निवेश ज्यादा जोखिम भरे होते हैं.

आजकल शेयरों की ट्रेडिंग इलेक्ट्रॉनिक तरीके से होती है. यह प्रक्रिया मुम्बई स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के जरिए की जाती है. एक्सचेंज के अलावा निवेशक शेयर खान, रिलायंस मनी, आईसीआईसी डाइरेक्ट जैसे ब्रोकरेज हाउस की भी सहायता ले सकते हैं.

भारत के शेयर मार्केट

भारत के शेयर मार्केट कैसे काम करते हैं। भारत के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों BSE औेर NSE के बारे में जानकारी, ये कैसे काम करते हैं, इन पर ट्रेडिंग कैसे होती है, इनके इडेक्स कौन से हैं और इन्हें कौन रेगुलेट करता है। भारत में शेयर मार्केट में निवेश से पहले यह जानना आवश्यक है कि प्रमुख भारतीय स्टॉक एक्सचेंज कौन से हैं और इनके जरिये निवेश करने की प्रक्रिया क्या है। साथ ही जानेंगे कि इनमें कौन और कैसे निवेश कर सकता है। About Indian Stock Markets in Hindi.

भारत के शेयर मार्केट

भारत के शेयर मार्केट

BSE औेर NSE हैं भारत के शेयर मार्केट

भारत के दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज हैं जहां यहां की अधिकतर शेयर ट्रेडिंग होती है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE। बीएसई 1875 से स्थापित दुनिया के शेयर बाजारों में सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंजों में से एक है। दूसरी ओर, एनएसई 1992 में स्थापित किया गया था और इसने 1994 से व्यापार शुरू किया था। हालांकि, दोनों एक्सचेंज एक ही ट्रेडिंग मैक्निजम का पालन करते हैं। दोनो बाजारों के काम के घंटे और निपटान प्रक्रिया भी एक सी है। BSE पर लगभग 5000 और NSE पर 2000 कंपनियां लिस्टेड हैं।

भारत के शेयर मार्केट – Share Market में Trading

दोनों एक्सचेंजों पर ट्रेडिंग एक इलेक्ट्रॉनिक लिमिट ऑर्डर बुक के माध्यम से होती है जिसमें सौदे कंप्यूटर द्वारा ऑर्डर मिलान से किये जाते है। पूरी प्रक्रिया ऑर्डर संचालित होती है जिसका अर्थ है कि निवेशकों द्वारा लगाए गए ट्रेड ऑर्डर स्वचालित रूप से सर्वोत्तम कीमत के ऑर्डर के साथ मेल खाते हैं। नतीजतन, खरीदार और विक्रेता गुमनाम रहते हैं। ऑर्डर-संचालित बाजार का लाभ यह है कि यह ट्रेडिंग सिस्टम में सभी खरीद और बिक्री के आदेश टर्मिनल पर प्रदर्शित होते हैं। इससे ट्रेडिंग में अधिक पारदर्शिता आती है।

Broker

ट्रेडिंग सिस्टम में सभी ऑर्डर दलालों यानी ब्रोकर के माध्यम से ही डाले जा सकते है। कई ब्रोकर ग्राहकों को ऑनलाइन ट्रेडिंग की सुविधा प्रदान करते हैं। संस्थागत निवेशक डायरेक्ट मार्केट एक्सेस के विकल्प का भी लाभ उठा सकते हैं जिसमें वे दलालों द्वारा उपलब्ध कराए गए ट्रेडिंग टर्मिनलों का उपयोग सीधे स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग सिस्टम में ऑर्डर देने के लिए करते हैं।

सैटलमेंट Settlement

इक्विटी स्पॉट मार्केट T + 2 रोलिंग सैटलमेंट का पालन करती है। इसका मतलब यह है कि ट्रेडिंग के दिन के बाद दो दिन में सौदा निपट जायेगा। मंगल वार को किया गया कोई भी ट्रेड वीरवार तक निपट जाता है। स्टॉक एक्सचेंज पर सभी ट्रेडिंग सुबह 9:55 से 3:30 बजे के बीच सोमवार से शुक्रवार तक होती है। शेयरों का ट्रांसफर डीमैटरियलाइज्ड रूप में किया जाता है। प्रत्येक एक्सचेंज का अपना क्लियरिंग हाउस होता है।

इंडैक्स Index

भारतीय बाजारों के दो प्रमुख इंडैक्स यानी सूचकांक हैं सेंसेक्स और निफ्टी। सेंसेक्स BSE का सूचकांक है और वहां लिस्टेड 30 कंपनियों पर आधरित है। निप्टी NSE का इंडैक्स है और वहां लिस्टेड 50 कंपनियों पर आधारित है। इंडैक्स में शामिल करने के लिये कंपनियों का चुनाव अलग अलग उद्योगों से किया जाता है जिससे कि इंडैक्स में सभी उद्योगों का समुचित प्रतिनिधित्व मिल सके।

Share Market के Regulator

शेयर बाजार के विकास, विनियमन और पर्यवेक्षण की संपूर्ण जिम्मेदारी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी के पास रहती है, जिसका गठन 1992 में एक स्वतंत्र प्राधिकरण के रूप में किया गया था। इसके अलावा इन स्टॉक एक्सचेंजों का अपना अंदरुनी रेग्यूलेशन भी है जो कि निवेशकों के हितों को ध्यान में रख कर बनाया जाता है। भारत का वित्त मंत्रालय भी इनके कामकाज पर नजर रखता है।

यहां हमने समझने की कोशिश की कि भारत के शेयर मार्केट कैसे काम करते हैं। आप भी यदि शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं शेयर बाजार कि जानकारी प्राप्त कर लें अन्यथा शेयर बाजार में सीधे निवेश ना कर म्यूचुअल फंड के जरिये ही निवेश करें।

ट्रेडिंग अकाउंट में लाखों रुपए के नुकसान से बचना है तो गलती से भी न भूलें इन टिप्स को

हाल के दिनों में फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और आपको इनसे बचकर रहने की जरूरत है। अगर आप थोड़ी सी भी चूक होगी तो आपको लाखों रुपए का चूना लग सकता है। आजकल शेयर मार्केट में ट्रेडिंग में सभी लोगों.

ट्रेडिंग अकाउंट में लाखों रुपए के नुकसान से बचना है तो गलती से भी न भूलें इन टिप्स को

हाल के दिनों में फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और आपको इनसे बचकर ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग सिस्टम कैसे काम करता है रहने की जरूरत है। अगर आप थोड़ी सी भी चूक होगी तो आपको लाखों रुपए का चूना लग सकता है। आजकल शेयर मार्केट में ट्रेडिंग में सभी लोगों की दिलचस्पी होती है और आप में से बहुत लोग शेयर बाजार में ट्रेडिंग भी करते होंगे, आपके ट्रेडिंग अकाउंट में काफी स्टॉक्स होंगे और उनकी वैल्यू भी काफी होगी। ऐसे में अगर आप सावधानी नहीं रखेंगे तो आपको लाखों रुपए का नुकसान होने की आशंका है। हम आपको बता रहे हैं, शेयर बाजार में ट्रेडिंग करते समय किन बातों को गलती से भी नहीं भूलना चाहिए-

> केवल रेजिस्टर्ड स्टॉक ब्रोकर के साथ ही व्यवहार/अनुबंध करें - जिस ब्रोकर के साथ आप लेन-देन कर रहे हों, उसके रेजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की जाँच कर लें।

> फिक्सड/गारंटीकृत/नियमित रिटर्न/कैपिटल प्रोटेक्शन प्लान्स से सावधान रहें। ब्रोकर या उनके औथोरइज्ड व्यक्ति या उनका कोई भी प्रतिनिधि/कर्मचारी आपके इन्वेस्ट पर फिक्सड/गारंटीकृत/नियमित रिटर्न/कैपिटल प्रिजरवेसन देने के लिए औथोरइज्ड नहीं है या आपके द्वारा दिये गए पैसो पर ब्याज का भुगतान करने के लिए आपके साथ कोई लोन समझौता करने के लिए औथोरइज्ड नहीं है। कृपया ध्यान दें कि आपके खाते में इस प्रकार का कोई व्यवहार पाए जाने पर आपका दिवालिया/निष्कासित ब्रोकर संबंधी दावा निरहन कर दिया जाएगा।

> कृपया आपने 'केवाईसी' (KYC) पेपर में सभी जरूरी जानकारी खुद भरें और ब्रोकर से अपने 'केवाईसी' पेपर की नियम अनुसार साइन की हुई प्रति प्राप्त करें। उन सभी शर्तों की जांच करें जिन्हें आपने सहमति और स्वीकृति दी है।

> सुनिश्चित करें कि आपके स्टॉक ब्रोकर के पास हमेशा आपका नया और सही कांटैक्ट डिटेल हो जैसे ईमेल आईडी/मोबाइल नंबर। ईमेल और मोबाइल नंबर जरूरी है और एक्सचेंज रिकॉर्ड में अपडेट के लिए आपको अपने ब्रोकर को मोबाइल नंबर देना होगा। यदि आपको एक्सचेंज/डिपॉजिटरी से नियमित रूप से संदेश नहीं मिल रहे हैं, तो आपको स्टॉक ब्रोकर/एक्सचेंज के पास इस मामले को उठाना चाहिए।

> इलेक्ट्रॉनिक (ई-मेल) कॉन्ट्रैक्ट नोट्स/फाइनेंशियल डिटेल्स का चयन सिर्फ तभी करें जब आप खुद कंप्यूटर के जानकार हों और आपका अपना ई-मेल अकाउंट हो और आप उसे प्रतिदिन/नियमित देखते हो।

> आपके द्वारा किए गए ट्रेड के लिए एक्सचेंज से प्राप्त हुए किसी भी ईमेल/एसएमएस को अनदेखा न करें। अपने ब्रोकर से मिले कॉन्ट्रैक्ट नोट/अकाउंट के डिटेल से इसे वेरिफ़ाई करें। यदि कोई गड़बड़ी हो, तो अपने ब्रोकर को तुरंत इसके बारे में लिखित रूप से सूचित करें और यदि स्टॉक ब्रोकर जवाब नहीं देता है, तो एक्सचेंज/डिपॉजिटरी को तुरंत रिपोर्ट करें।

> आपके द्वारा निश्चित की गई अकाउंट के सेटलमेंट कि फ्रिक्वेन्सी की जांच करें। यदि आपने करेंट अकाउंट (running account) का ऑप्शन चुना है, तो कृपया कन्फ़र्म करें कि आपका ब्रोकर आपके अकाउंट का नियमित रूप से सेटलमेंट करता है और किसी भी स्थिति में 90 दिनों में एक बार ( यदि आपने 30 दिनों के सेटलमेंट का विकल्प चुना है तो 30 दिन) डिटेल्स भेजता है । कृपया ध्यान दें कि आपके ब्रोकर द्वारा डिफॉल्ट होने की स्थिति में एक्सचेंज द्वारा 90 दिनों से अधिक की अवधि के दावे एक्सैप्ट नहीं किए जाएंगे।

> डिपॉजिटरी से प्राप्त जॉइंट अकाउंट की जानकारी (Consolidated Account Statement- CAS) नियमित रूप से वेरिफ़ाई करते रहें और अपने ट्रेड/लेनदेन के साथ सामंजस्य स्थापित करें।

> कन्फ़र्म करें कि पे-आउट की तारीख से 1 वर्किंग डे के भीतर आपके खाते में धनराशि/सिक्योरिटी (शेयर) का पेमेंट हो गया हो। कन्फ़र्म करें कि आपको अपने ट्रेड के 24 घंटों के भीतर कॉन्ट्रैक्ट नोट मिलते हों।

> एनएसई की वेबसाइट पर ट्रेड वेरिफिकेशन की सुविधा भी उपलब्ध है जिसका उपयोग आप अपने ट्रेड के वेरिफिकेशन के लिए कर सकते हैं।

> ब्रोकर के पास अनावश्यक बैलेंस न रखें। कृपया ध्यान रहे कि ब्रोकर के दिवालिया निष्कासित होने पर उन खानों के दावे स्वीकार नहीं होंगे जिनमें 90 दिन से कोई ट्रेड ना हुआ हो।

> ब्रोकर्स को सिक्यूरिटि के ट्रांसफर को मार्जिन के रूप में स्वीकार करने की अनुमति नहीं है। मार्जिन के रूप में दी जाने वाली सिक्योरिटी ग्राहक के अकाउंट में ही रहनी चाहिए और यह ब्रोकर को गिरवी रखी जा सकती हैं। ग्राहकों को किसी भी कारण से ब्रोकर या ब्रोकर के सहयोगी या ब्रोकर के औथोरइज्ड व्यक्ति के साथ कोई सिक्यूरिटी रखने की अनुमति नहीं है। ब्रोकर केवल कस्टमर द्वारा बेची गई सिक्योरिटी के डिपोजिट करने के लिए ग्राहकों से संबंधित सिक्योरिटी ले सकता है।

> भारी मुनाफे का वादा करने वाले शेयर/सिक्योरिटी में व्यापार करने का लालच देकर ईमेल और एसएमएस भेजने वाले धोखेबाजों के झांसे में न आएं। किसी को अपना यूजर आईडी और पासवर्ड ना दें। आपके सारे शेयर या बैलेंस शून्य हो सकता है। यह भी हो सकता है कि आपके खाते में बड़ी राशि की वसूली निकल आए।

> पीओए (पावर ऑफ अटॉर्नी) देते समय सावधान रहें - सभी अधिकार जिनका स्टॉक ब्रोकर प्रयोग कर सकते हैं और समय सीमा जिसके लिए पीओए मान्य है, इसे स्पष्ट रूप से बताएँ। यह ध्यान रहे कि सेबी/एक्सचेंजों के अनुसार पीओए अनिवार्य / आवश्यक नहीं है।

> ब्रोकर द्वारा रिपोर्ट किए गए फंड और सिक्योरिटी बैलेंस के बारे में साप्ताहिक आधार पर एक्सचेंज द्वारा भेजे गए मैसेजों की जांच करें और यदि आप इसमें कोई अंतर पाते हैं, तो तुरंत एक्सचेंज को शिकायत करें।

> किसी के साथ पासवर्ड (इंटरनेट अकाउंट) शेयर न करें। ऐसा करना अपने सुरक्षित पैसे शेयर करने जैसा है।

> कृपया सेबी के रेजिस्टर्ड स्टॉक ब्रोकर के अलावा किसी औथोरइज्ड व्यक्ति या ब्रोकर के सहयोगी सहित किसी को भी ट्रेडिंग के उद्देश्य से फंड ट्रांसफर न करें।

डिस्क्लेमर- जानकारी आपको एनएसई से मिली सूचना के आधार पर है।

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